मानव की सुरक्षा
कफ़न बेचकर खाने वालो
जरा अपने लिए
दो गज जमीन तो तैयार करो !
कव्वे को खाना खिलाने वालो
जरा उनकी सुरक्षा के लिए
घौसले को तो पहले सुरक्षित करो !
स्वर्ग, मोक्ष की दुहाई देकर मंदिर सजाने वालो
मानव की सुरक्षा के लिए
पहले गरीबो की रोजी रोटी तैयार करो !
---प्रा. संदीप नंदेश्वर, नागपुर, ८७९३३९७२७५
कफ़न बेचकर खाने वालो
जरा अपने लिए
दो गज जमीन तो तैयार करो !
कव्वे को खाना खिलाने वालो
जरा उनकी सुरक्षा के लिए
घौसले को तो पहले सुरक्षित करो !
स्वर्ग, मोक्ष की दुहाई देकर मंदिर सजाने वालो
मानव की सुरक्षा के लिए
पहले गरीबो की रोजी रोटी तैयार करो !
---प्रा. संदीप नंदेश्वर, नागपुर, ८७९३३९७२७५
Amazing poem sir. Very nice. Keep it up.
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