आज
इस कदर द्वेष मूलक भावनाओंको पैदा किया जा रहा है ताकि यह समाज फिर अपना
सर उठा कर चल न सके. इन्द्रनील खैरे जैसे लोग उसी कड़ी का हिस्सा है !
इन्हें बसपा के माध्यम से जो ट्रेनिंग दी जा रही है वही यह बहार आकर
चिल्लाते है ! सही मायने में राजनीती की चौकट के यह कुत्ते कभी किसी समाज
का, विचारधारा का और किसी परिवर्तनवादी महापुरुशोंका प्रतिनिधित्वा नहीं कर
सकते ! हमें फिर एक बार ४० साल पहले शुरू हुए उस दौर
को एक नए सिरे से सोचना होगा ! क्या हमने सही बाबासाहब और बुद्ध को लोगो
के दिमाग में डाला या फिर खुद को महापुरुष और महामाया बनाने के लिए पुरे
कौम को बदनाम कर आम्बेद्कारी समाज को जिल्लत भरी नजरो से देखने पर मजबूर
किया ! यह प्रक्रिया आज की नहीं है ! कई सालो से यह चल रही है ! और आज इस
कड़ी का अंतिम चरण आ चूका है ! अगर इस वक्त यह परिस्थितिया नहीं सुधर सकी तो
आनेवाले दिन इनके जबान से आवाज भी निकालने नहीं देंगे ! सिर्फ बसपा ही
नहीं बल्कि ऐसे कई संघटन है जो बाबासाहब और बुद्ध को अपमानित करने के लिए
काम कर रहे है ! जिनमे प्रमुखातःसे बामसेफ, मुक्ति मोर्चा, संगोष्टी,
मूलनिवासी इ. पूरी जोर शोर से आम्बेद्कारी विचारधारा को तोड़ मरोड़ करने के
लिए लगे है ! विरोधियोंके हस्तक बनकर अपने ही हमें तोड़ने लगे है ! अब यह
जिम्मेवारी उन लोगो की है जिन लोगो ने रिअल बाबासाहब पढ़ा है ! और आज की
वास्तवता में आम्बेद्कारी विचारोंका सही इस्तमाल करना सिखा है ! (राजनीती
छोड़ कर) सिर्फ और सिर्फ राजनीती के कारन इन लोगो ने कई पीढ़िया बर्बाद की
है और आनेवाली पीढ़ी बर्बाद करने जा रहे है ! ऐसे दिडदमड़ी के
आम्बेडकरवादियोंसे सावधान रहना और इन्हें इनकी असली पहचान दिलाना जरुरी है !
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